खत्म होगा खेल तीन तलाक का
देश की सर्वाधिक चर्चित, विवादित और जटिल सामाजिक मुद्दों में से एक तीन तलाक पर पिछले एक साल से चला आ रहा विवाद आज लगभग थम सा गया जब सुप्रीम कोर्ट के पाँच सदस्यीय बेंच में से तीन जजों ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया। जिन तीन जजों ने तीन तलाक को असंवैधानिक बताते हुये इसका विरोध किया वे हैं क्रमशः जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस नरीमन और जस्टिस यू यू ललित। इन तीनों ने जस्टिस नज़ीर और चीफ़ जस्टिस खेहर की राय का विरोध किया और नतीजतन कोर्ट ने इस व्यवस्था को पूरी तरह से खारिज करते हुये संसद से 6 महीने के अंदर इस बाबत कानून बनाने को कहा।
आज से लगभग एक साल पहले उत्तराखंड के काशीपुर की एक महिला शायरा बानो के द्वारा दायर एक याचिका ने पूरे देश में एक जबरदस्त हलचल पैदा कर दिया था। बाद में एक के बाद एक अन्य कई लोगों ने भी इसका समर्थन किया और शायरा के साथ इस मुहिम में आ खड़े हुये थे। शायरा ने न सिर्फ तीन तलाक का विरोध किया बल्कि उन अन्य इस्लामिक परम्पराओं का भी पुरजोर विरोध किया था जिसके कारण अधिकांश मुस्लिम महिलाओं को विभिन्न प्रकार की सामाजिक, शारीरिक एवं मानसिक यातनाओं से गुजरना पड़ता था मसलन बहुविवाह एवं हलाला आदि।
शायरा के अलावा इन चार मुस्लिम महिलाओं ने भी तीन तलाक के विरोध में अपनी आवाज़ बुलंद की। ये चारों महिलाएं हैं - उत्तर प्रदेश के रामपुर की गुलशन परवीन, उत्तर प्रदेश के ही सहारनपुर की आतिया साबरी, पश्चिम बंगाल के हावड़ा की इशरत जहाँ और जयपुर की आफ़रीन रहमान। तीन तलाक के विरोध में खड़ी होने वाली इन चारों महिलाओं की त्रासदी भी कम अजीब नहीं। दो साल के बेटे की माँ गुलशन परवीन को उसके पति ने 10 रुपये के स्टाम्प पेपर पर तलाक दे दिया वहीं आतिया साबरी के पति ने सादे कागज पर ही तीन तलाक लिख कर उसे तलाक दे दिया। आतिया का क़ुसूर सिर्फ इतना था की उसने दो लड़कियों को जन्म दिया था। जयपुर की आफ़रीन रहमान को उसके पति ने स्पीड पोस्ट से तलाक दे दिया था तो हावड़ा की इशरत जहाँ को उसके पति ने फोन पर ही दुबई से तलाक दे दिया।
वर्षों से चली आ रही इस कुरीति के खिलाफ आवाज़ बुलंद करने वाली इन महिलाओं के साहस को सलाम और इस ऐतिहासिक जीत की बधाई !!!
*सभी चित्र गूगल से साभार
*सभी चित्र गूगल से साभार


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